शौर्य टाईम्स : नीतू विश्वकर्मा
उल्हासनगर- 3 में करीब 65 कर्मचारियों से कथित तौर पर ₹35 हजार मांगने का आरोप; बैंक लेनदेन, आर्थिक व्यवहार और विद्यार्थियों से शुल्क वसूली की भी जांच की मांग
उल्हासनगर- 3: श्री गुरु गोबिंद सिंह हिंदी हाईस्कूल में अंतरिम कार्यभार संभाल रहे श्री विद्यासागर श्रीधर उपाध्याय की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर आरोप सामने आने का दावा किया जा रहा है। कर्मचारियों से कथित रूप से बड़ी राशि की मांग, आर्थिक लेनदेन में अनियमितता तथा कर्मचारियों पर दबाव बनाने से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग उठ रही है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, विद्यालय के लगभग 65 कर्मचारियों से प्रत्येक से ₹35 हजार की राशि मांगे जाने का आरोप है। कुछ कर्मचारियों से कथित रूप से नकद राशि लिए जाने, जबकि कुछ कर्मचारियों को सुश्री हरविंदरकौर मठारू (उर्फ हनी) के बैंक खाते में ऑनलाइन राशि जमा करने के लिए कहा गया, ऐसा दावा किया जा रहा है।
💰 बैंक खाते और आर्थिक लेनदेन की जांच जरूरी
इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए संबंधित बैंक खाते के पिछले लेनदेन की स्वतंत्र जांच किए जाने की मांग की जा रही है। किस कर्मचारी ने किस तारीख को, कितनी राशि और किस उद्देश्य से जमा की—इसकी पुष्टि बैंक रिकॉर्ड, भुगतान प्रमाण, रसीदों, लेखा पुस्तकों तथा अन्य संबंधित दस्तावेजों के माध्यम से की जानी चाहिए।
⚠️ राशि नहीं देने वाले कर्मचारियों पर दबाव का आरोप
कुछ कर्मचारियों को कथित रूप से राशि देने से इनकार करने पर पुलिस शिकायत या FIR दर्ज कराने तथा नौकरी से हटाने की धमकी दिए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। ऐसे में कर्मचारियों के बयान गोपनीय रूप से दर्ज किए जाने तथा जांच के दौरान किसी भी कर्मचारी पर दबाव, धमकी या प्रतिशोध न हो, यह सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है।
🎓 विद्यार्थियों से कथित शुल्क वसूली की भी हो जांच
यदि विद्यालय शासनमान्य अथवा अनुदानित संस्था के अंतर्गत आता है, तो विद्यार्थियों से कथित रूप से वसूले गए विभिन्न शुल्कों की भी जांच किए जाने की मांग की जा रही है।
शुल्क किस उद्देश्य से लिया गया, किस नियम या अधिकार के तहत लिया गया और प्राप्त राशि का उपयोग कहां किया गया, इसकी पुष्टि के लिए शुल्क रसीदें, बैंक लेनदेन, लेखा-जोखा और संबंधित वित्तीय दस्तावेजों की जांच आवश्यक बताई जा रही है।
🔎 आरोप सही हैं या निराधार—जांच से हो स्पष्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित शिक्षा विभाग अथवा सक्षम प्राधिकरण से स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की मांग की जा रही है।
यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों को स्पष्ट रूप से आरोपमुक्त किया जाना चाहिए। वहीं, जांच में आरोप प्रथमदृष्टया सही पाए जाने पर नियमानुसार प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
🚨 कर्मचारियों और अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण सावधानी
किसी भी कर्मचारी या अभिभावक से यदि बिना अधिकृत रसीद, लिखित आदेश या स्पष्ट नियम के तहत धनराशि की मांग की जाती है, तो भुगतान करने से पहले उसकी वैधता की पुष्टि करना आवश्यक है। किसी भी भुगतान की स्थिति में रसीद, बैंक ट्रांजेक्शन, संदेश या अन्य प्रमाण सुरक्षित रखना भविष्य में जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण: इस समाचार में उल्लिखित सभी आरोप सूत्रों से प्राप्त जानकारी एवं कथित शिकायतों पर आधारित हैं। ये आरोप अभी तक किसी अधिकृत जांच में सिद्ध नहीं हुए हैं। संबंधित व्यक्तियों का आधिकारिक पक्ष तथा सक्षम प्राधिकरण की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
जनहित में उद्देश्य: इस खबर का उद्देश्य किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच, वित्तीय पारदर्शिता और कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के हितों की सुरक्षा की मांग को सामने रखना है।
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