🚨 ₹1.10 करोड़ की प्रशासकीय मंजूरी के बावजूद सड़क का मुद्दा अधर में? उल्हासनगर-4 के महत्वपूर्ण मार्ग को लेकर मनपा प्रशासन से जवाबदेही की मांग







https://youtube.com/shorts/GXAfNGowkNk?si=BYyIX4m2oRUMcZcK


शौर्य टाइम्स : नीतू विश्वकर्मा 

सूर्या इंटरनेशनल होटल से खडगोळकर वस्ती प्रवेशद्वार होते हुए गावदेवी मंदिर तक सड़क के लिए ₹77 लाख शासन हिस्सा और ₹33 लाख स्थानीय हिस्सा मंजूर; बार-बार मामला उठाने के बावजूद कार्रवाई पर सवाल

उल्हासनगर शहर में विकास कार्यों के लिए शासन स्तर से मंजूरी और निधि उपलब्ध होने के बावजूद यदि संबंधित स्थल की वास्तविक स्थिति और नागरिकों की समस्याओं की अनदेखी होती है, तो यह गंभीर प्रशासनिक सवाल बन जाता है। उल्हासनगर-4 क्षेत्र में सूर्या इंटरनेशनल होटल से खडगोळकर वस्ती प्रवेशद्वार होते हुए गावदेवी मंदिर तक प्रस्तावित सड़क के मामले में भी अब इसी तरह के सवाल उठ रहे हैं।

उपलब्ध जिला नियोजन समिति, जिल्हाधिकारी कार्यालय, ठाणे के दस्तावेज के अनुसार, इस सड़क के कंक्रीटीकरण कार्य को ₹1.10 करोड़ की प्रशासकीय मान्यता दी गई है। इसमें ₹77 लाख शासन हिस्सा तथा ₹33 लाख स्थानीय स्वराज्य संस्था का हिस्सा दर्शाया गया है। दस्तावेज में तकनीकी मान्यता की तारीख 26 सितंबर 2024 दर्ज है, जबकि प्रशासकीय मान्यता आदेश पर 17 नवंबर 2025 की तारीख दिखाई देती है।

📌 दस्तावेज में क्या है?

दस्तावेज के अनुसार कार्य का विवरण है—

“उल्हासनगर महानगरपालिका क्षेत्रातील उल्हासनगर-4 पेठीतील सूर्या इंटरनॅशनल हॉटेल ते खडगोळकर वस्ती प्रवेशद्वार ते गावदेवी मंदिर पर्यंत रस्ता काँक्रीटीकरण करणे.”

योजना: जिला वार्षिक योजना (नागरी विकास)
कुल प्रा.मा.: ₹1.10 करोड़ (शासन: ₹77 लाख 
संस्था: ₹33 लाख)
तक.मा. दिनांक: 26/09/2024

महाराष्ट्र शासन के नियोजन विभाग की उपलब्ध जानकारी के अनुसार जिला वार्षिक योजना के अंतर्गत विकास कार्यों के लिए प्रशासनिक मंजूरी, निधि वितरण और कार्यान्वयन की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत की जाती है। 2025-26 के लिए शासन ने स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के कार्यों की सूची, प्रशासनिक मंजूरी तथा बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए ऑनलाइन यूनिक आईडी जैसी प्रक्रियाओं पर भी निर्देश जारी किए हैं।

❗ मंजूरी के बाद भी जमीनी स्थिति पर सवाल ?

स्थानीय स्तर पर इस मामले को कई बार उठाए जाने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि संबंधित स्थल की वास्तविक परिस्थितियों, सड़क की आवश्यकता और नागरिकों को होने वाली परेशानी पर गंभीरता से ध्यान देने के बजाय मामले को अलग-अलग स्पष्टीकरणों के माध्यम से टालने का प्रयास किया जा रहा है।

हालांकि, “झूठी जानकारी” या जानबूझकर मामले को दबाने का आरोप एक गंभीर आरोप है, इसलिए इसकी पुष्टि संबंधित पत्राचार, शिकायतों, स्थल निरीक्षण रिपोर्ट और मनपा के आधिकारिक जवाबों से होना आवश्यक है। इन दस्तावेजों को सार्वजनिक करने से पूरे मामले की पारदर्शी तस्वीर सामने आ सकती है।

🔎 अब मनपा प्रशासन से सीधे सवाल

यदि किसी सड़क के लिए शासन और स्थानीय संस्था के हिस्से सहित ₹1.10 करोड़ की प्रशासकीय मंजूरी उपलब्ध है, तो नागरिकों का स्वाभाविक सवाल है—

  • काम की वर्तमान स्थिति क्या है?
  • वर्क ऑर्डर जारी हुआ है या नहीं?
  • निविदा प्रक्रिया पूरी हुई या लंबित है?
  • ठेकेदार नियुक्त किया गया है या नहीं?
  • यदि काम शुरू नहीं हुआ तो उसकी वास्तविक वजह क्या है?
  • ₹77 लाख के शासन हिस्से और ₹33 लाख के स्थानीय हिस्से की निधि की वर्तमान स्थिति क्या है?
  • क्या स्थल का हालिया तकनीकी निरीक्षण किया गया है?
  • क्या प्रस्तावित सड़क की वर्तमान स्थिति मूल प्रस्ताव से बदल गई है?
  • यदि कोई तकनीकी/प्रशासकीय अड़चन है तो उसका लिखित आदेश क्या है?
उल्हासनगर में विकास कार्यों से संबंधित निविदाएं और सड़क निर्माण कार्य लगातार सामने आते रहे हैं। उदाहरण के तौर पर 2026 में भी महाराष्ट्र सुवर्ण जयंती नगरोत्थान अभियान के अंतर्गत उल्हासनगर में करोड़ों रुपये के विकास कार्यों के लिए निविदाएं जारी हुई हैं।

📢 महापौर और मनपा आयुक्त से उच्चस्तरीय संज्ञान की मांग

अब इस मामले में उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त तथा महापौर से तत्काल संज्ञान लेकर स्थल का संयुक्त निरीक्षण कराने और पूरी फाइल सार्वजनिक करने की मांग की जा रही है।

विशेष रूप से यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि प्रशासकीय मान्यता मिलने के बाद संबंधित सड़क का कार्य किस चरण में पहुंचा और अब तक नागरिकों को उसका लाभ क्यों नहीं मिला।

यदि पहले भी लिखित शिकायतें और निवेदन दिए गए हैं, तो उन पर की गई कार्रवाई की Action Taken Report (ATR) सार्वजनिक की जानी चाहिए। साथ ही संबंधित अधिकारियों से समयबद्ध रिपोर्ट लेकर नागरिकों को वास्तविक स्थिति बताना प्रशासन की जवाबदेही का हिस्सा होना चाहिए।


⚠️ सवाल सिर्फ एक सड़क का नहीं, जवाबदेही का है?

सरकारी निधि से स्वीकृत विकास कार्य कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि मंजूर राशि किस स्थिति में है, कार्य कब शुरू होगा और निर्धारित मानकों के अनुसार कब पूरा किया जाएगा।

अब जरूरत आश्वासन या मौखिक स्पष्टीकरण की नहीं, बल्कि दस्तावेजी जवाब, स्थल निरीक्षण और समयबद्ध कार्रवाई की है।

शौर्य टाइम्स की मांग:

  • 👉 मनपा प्रशासन पूरे मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट सार्वजनिक करे।
  • 👉 महापौर स्वयं स्थल निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट लें।
  • 👉 स्वीकृत ₹1.10 करोड़ की निधि और कार्य की वर्तमान स्थिति स्पष्ट की जाए।
  • 👉 पूर्व शिकायतों पर हुई कार्रवाई की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
  • 👉 यदि किसी स्तर पर अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जाए।
स्रोत: उपलब्ध जिला नियोजन समिति/जिलाधिकारी कार्यालय, ठाणे का प्रशासकीय मान्यता दस्तावेज; महाराष्ट्र शासन, नियोजन विभाग के जिला वार्षिक योजना संबंधी शासन निर्देश।

नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध दस्तावेज और उठाए गए प्रशासनिक सवालों पर आधारित है। भ्रष्टाचार, जानबूझकर गुमराह करने या अन्य अनियमितता संबंधी किसी भी आरोप की पुष्टि संबंधित जांच अथवा आधिकारिक रिकॉर्ड से होना आवश्यक है।

Post a Comment

Please Select Embedded Mode To Show The Comment System.*

Previous Post Next Post