शौर्य टाईम्स : नीतू विश्वकर्मा
उल्हासनगर:कल्याण-मुरबाड रोड, शाहाड स्थित क्रॉसटाउन वन कल्याण विंग A,B,C,D को-ऑप. हाउसिंग सोसाइटी के 2000 से अधिक रहवासियों ने आखिरकार पुलिस का दरवाजा खटखटाया है। लगातार लिफ्ट फेल होने और बिल्डर की लापरवाही से तंग आकर सोसाइटी ने उल्हासनगर-1 पुलिस स्टेशन में बिल्डर Troika Estates Pvt Ltd (Ajmera Group) और मेंटेनेंस एजेंसी Eros Elevators के खिलाफ आपराधिक लापरवाही और मानव जीवन को खतरे में डालने के आरोप में FIR दर्ज करने की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
सोसाइटी में 508 फ्लैट और 2000 से ज्यादा रहवासी रहते हैं। रहवासियों का आरोप है कि पिछले एक साल से उनकी सुरक्षा से खिलवाड़ हो रहा है।
ताजा घटना 27 सितंबर 2026, शाम 7:00 से 7:30 के बीच हुई। सी-विंग के फ्लैट 1301 में रहने वाले वरिष्ठ नागरिक श्री जितेंद्र रजनी 20 मिनट से ज्यादा समय तक लिफ्ट में फंसे रहे। सोसाइटी का आरोप है कि बिल्डर द्वारा नियुक्त सुरक्षा कर्मचारी लिफ्ट रेस्क्यू में पूरी तरह अप्रशिक्षित थे, जिससे बुजुर्ग व्यक्ति घबराहट में फंसे रहे। बाद में बाहर की टेक्निकल टीम ने उन्हें निकाला। इस घटना से उन्हें मानसिक आघात और शारीरिक तकलीफ हुई, जिसका मेडिकल रिपोर्ट शिकायत के साथ जोड़ा गया है।
यह कोई पहली घटना नहीं है - रहवासियों के गंभीर आरोप:
1. 50 से अधिक बार लिफ्ट में फंसने की घटनाएं: पिछले एक साल में अकेले सोसाइटी में 50 से ज्यादा बार लोग लिफ्ट में फंस चुके हैं।
2. लेवलिंग की खतरनाक समस्या:सी-विंग सहित अन्य विंग की लिफ्ट टॉप फ्लोर पर सही लेवल पर नहीं रुकती, जिससे गिरने और चोट लगने का खतरा बना रहता है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए।
3. 250 रहवासियों का मोर्चा: हालात इतने बिगड़ गए कि 31 जनवरी को 250 से अधिक रहवासियों को बिल्डर के सेल्स ऑफिस तक विरोध मार्च निकालना पड़ा।
4. झूठे वादे और नाकाम बातचीत: रहवासियों ने CRM टीम के साथ 10 से अधिक औपचारिक बैठकें और कंपनी के बड़े अधिकारियों के साथ 2 हाई-लेवल मीटिंग कीं, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं मिला।
जनहित में प्रशासन से मांग:
सोसाइटी की प्रोविजनल मैनेजिंग कमेटी के चेयरमैन गौरव दुसे-जा, सेक्रेटरी सिमित चड्ढा और ट्रेजरर घनश्याम गोधवानी सहित 15 सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित इस शिकायत में कहा गया है कि यह बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ है।
सोसाइटी की प्रमुख मांगें:
- बिल्डर और लिफ्ट मेंटेनेंस कंपनी के खिलाफ BNS की धारा 125 (दूसरों के जीवन को खतरे में डालना) और लापरवाही के तहत तत्काल FIR दर्ज हो।
- महाराष्ट्र लिफ्ट एक्ट 1939 के तहत लिफ्टों का थर्ड पार्टी सेफ्टी ऑडिट कराया जाए।
- जब तक लिफ्ट 100% सुरक्षित न हो, बिल्डर पर कड़ी कार्रवाई हो।
इस शिकायत की कॉपी DCP, Zone 4, उल्हासनगर को भी भेजी गई है। उल्हासनगर पुलिस स्टेशन में शिकायत पर पोलीस ठाणे अंमलदार की मोहर लग चुकी है।
सार्वजनिक अपील: अगर आप भी ऐसी ही हाई-राइज सोसाइटी में रहते हैं, तो अपनी लिफ्ट का AMC, लाइसेंस और रेस्क्यू ट्रेनिंग जरूर जांचें। आपकी सतर्कता ही आपकी सुरक्षा है।

