🚨 RTI में बड़ा खुलासा? उल्हासनगर वृक्ष प्राधिकरण समिति की वैधता पर उठे गंभीर सवाल! 🌳⚖️

शौर्य टाईम्स : नीतू विश्वकर्मा

क्या नियमों को ताक पर रखकर गठित की गई वृक्ष प्राधिकरण समिति? RTI जवाब ने बढ़ाया विवाद

उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) में वृक्ष प्राधिकरण समिति (Tree Authority Committee) के गठन को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी में कई महत्वपूर्ण तथ्यों के अभाव और कथित अनियमितताओं के कारण समिति की वैधता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।


RTI कार्यकर्ता द्वारा मांगी गई जानकारी के जवाब में जन सूचना अधिकारी ने स्वीकार किया है कि समिति गठन के लिए किसी प्रकार की सार्वजनिक विज्ञप्ति अथवा विज्ञापन जारी नहीं किया गया था। इससे समिति सदस्यों के चयन की प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

🔴 मुख्य आरोप क्या हैं?

1️⃣ सार्वजनिक विज्ञापन नहीं दिया गया

RTI के उत्तर में स्पष्ट रूप से बताया गया कि वृक्ष समिति के गठन हेतु कोई सार्वजनिक विज्ञापन प्रकाशित नहीं किया गया।

➡️ इससे यह आशंका पैदा होती है कि योग्य एवं अनुभवी नागरिकों, पर्यावरण विशेषज्ञों तथा संबंधित NGOs को आवेदन का अवसर ही नहीं दिया गया।

2️⃣ NGO और अनुभव संबंधी जानकारी छिपाने का आरोप

RTI आवेदन में समिति के गैर-शासकीय (Non-Official) सदस्यों के बारे में निम्न जानकारी मांगी गई थी:


संबंधित NGO का नाम
NGO सदस्यता का प्रमाण
वृक्ष संरक्षण एवं संवर्धन क्षेत्र का अनुभव
चयन हेतु पात्रता के दस्तावेज
लेकिन RTI उत्तर में केवल सदस्यों के नाम उपलब्ध कराए गए। मांगी गई पात्रता और अनुभव संबंधी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।


➡️ आवेदक का आरोप है कि यह जानकारी जानबूझकर दबाई गई है।

RTI के साथ उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार समिति में:

3️⃣ समिति गठन में सदस्य संख्या नियमों के विरुद्ध?


7 नगरसेवक
8 बाहरी सदस्य
कुल 15 सदस्य दर्शाए गए हैं।
जबकि महाराष्ट्र वृक्ष संरक्षण एवं संवर्धन संबंधी प्रावधानों के अनुसार:
आयुक्त (Commissioner) पदसिद्ध अध्यक्ष होते हैं।
महापौर (Mayor) पदसिद्ध सदस्य होते हैं।


यदि इन्हें जोड़ा जाए तो कुल सदस्य संख्या 17 हो जाती है।


➡️ आवेदक का दावा है कि यह निर्धारित सीमा का उल्लंघन है और समिति का गठन नियम विरुद्ध प्रतीत होता है।

4️⃣ अध्यक्ष और पदसिद्ध सदस्यों का उल्लेख नहीं

RTI में उपलब्ध सूची में केवल 15 नाम दिए गए हैं।
आवेदक का कहना है कि:


पदसिद्ध अध्यक्ष (आयुक्त) का नाम नहीं है।
पदसिद्ध सदस्य (महापौर) का नाम नहीं है।
अध्यक्ष के बिना समिति की वैधानिक स्थिति संदिग्ध हो जाती है।

⚖️ जन सूचना अधिकारी पर कार्रवाई की मांग

आवेदक ने आरोप लगाया है कि यदि उपलब्ध अभिलेखों में NGO सदस्यता, अनुभव और पात्रता संबंधी दस्तावेज मौजूद हैं और फिर भी जानकारी नहीं दी गई, तो यह सूचना के अधिकार अधिनियम की भावना के विपरीत है।


उन्होंने जन सूचना अधिकारी के खिलाफ:


✅ विभागीय जांच
✅ अनुशासनात्मक कार्रवाई
✅ दंडात्मक कार्रवाई
की मांग उठाई है।

🌳 समिति को तत्काल भंग करने की मांग

आवेदक ने मांग की है कि यदि समिति का गठन नियमों के अनुरूप नहीं पाया जाता है, तो वर्तमान वृक्ष प्राधिकरण समिति को तत्काल भंग कर:


✔️ पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए
✔️ सार्वजनिक विज्ञापन जारी किया जाए
✔️ योग्य पर्यावरण विशेषज्ञों एवं NGOs को अवसर दिया जाए
✔️ विधिसम्मत नई समिति गठित की जाए

📢 जनहित का बड़ा सवाल

वृक्ष प्राधिकरण जैसी महत्वपूर्ण समिति शहर के पर्यावरण, वृक्ष संरक्षण और हरित विकास से जुड़ी होती है। ऐसे में समिति गठन में पारदर्शिता, वैधानिकता और पात्रता संबंधी नियमों का पालन अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
अब देखना यह होगा कि उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन इन आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या इस मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाती है।

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