उल्हासनगर में सह-नियुक्त नगरसेवक पद को लेकर सियासी भूचाल: BJP बनाम शिंदे-सेना, व्यापारी वर्ग नाराज




एक्सक्लूसिव: शौर्य टाइम्स की ग्राउंड रिपोर्ट

उल्हासनगर: उल्हासनगर महानगरपालिका की राजनीति में सह-नियुक्त नगरसेवक पद को लेकर एक नया और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 7 सह-नियुक्त पदों के बंटवारे को लेकर BJP और शिवसेना (शिंदे गुट) के बीच चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है, जिसका सीधा खामियाजा उल्हासनगर की जनता और व्यापारी वर्ग को भुगतना पड़ रहा है।

क्या है पूरा मामला? तय फॉर्मूला vs. हकीकत

सूत्रों के अनुसार, महानगरपालिका में 7 सह-नियुक्त नगरसेवकों की नियुक्ति होनी थी। पहले से तय गठबंधन फॉर्मूले के तहत 4 पद भारतीय जनता पार्टी (BJP) को और 3 पद शिवसेना (शिंदे गुट) को मिलने थे।

लेकिन वास्तविकता में खेल कुछ और ही खेला गया। आरोप है कि अंतिम सूची में इस फॉर्मूले को पलट दिया गया।

आरोप के अनुसार, BJP को केवल 2 पद मिले, जबकि 5 पद शिवसेना (शिंदे गुट) के खाते में चले गए।

इसको लेकर BJP के एक धड़े में भारी नाराजगी है। BJP के कुछ नेताओं का आरोप है कि महापौर मैडम अश्विनी निकम और आयुक्त ने इस मामले में लापरवाही बरती और उनकी बात नहीं सुनी गई। BJP का दावा है कि जो 2 सीटें खाली हुई थीं, उन्हें नियमों के विरुद्ध जाकर Co-opt में दिया गया है, जो पूरी तरह से अवैध है। सूत्र बता रहे हैं कि यह पूरा मामला अब कोर्ट में जाने वाला है और कोर्ट के आदेश का इंतजार है।

दीपक छतलानी का नाम और 20 व्यापारी संगठनों की अनदेखी

इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा ट्विस्ट प्रसिद्ध व्यापारी नेता दीपक छतलानी के नाम को लेकर आया है।

जानकारी के अनुसार, उल्हासनगर के 20 से अधिक व्यापारी संगठनों ने एकजुट होकर जिला अध्यक्ष राजेश वाधरिया जी को एक निवेदन दिया था। उनकी मांग थी कि उल्हासनगर के व्यापारियों के हितों को देखते हुए दीपक छतलानी जी को सह-नियुक्त नगरसेवक के लिए आवेदन करने की अनुमति दी जाए।

लेकिन आरोप है कि BJP के शीर्ष नेतृत्व और जिला अध्यक्ष ने व्यापारियों की इस सामूहिक मांग को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया।

राजनीतिक विश्लेषण: नुकसान किसका?

1. क्या BJP अपने ही कार्यकर्ताओं और समर्थकों को समर्थन नहीं दे रही? जब व्यापारी वर्ग, जो शहर की 95% अर्थव्यवस्था को संभालता है, उसकी बात नहीं सुनी जाएगी, तो उसका मनोबल टूटना स्वाभाविक है।

2. आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति: दोनों ही दल एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। लेकिन पर्दे के पीछे से यह भी चर्चा है कि ऊपर से आए आदेशों पर ही यह सब दिखावा किया जा रहा है। लिखने वाले भी वही और बताने वाले भी वही वाली स्थिति बन गई है।

3. भविष्य के चुनावों पर असर: व्यापारी संगठनों की नाराजगी का सीधा असर आने वाले खासदार और आमदार चुनावों पर पड़ सकता है।

सूत्र: व्यापारी संगठनों का संयुक्त निवेदन पत्र, महानगरपालिका के अंदरूनी सूत्र और शौर्य टाइम्स की ग्राउंड रिपोर्ट।

- रिपोर्ट: नीतू विश्वकर्मा, शौर्य टाइम्स, उल्हासनगर

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