🚨 नगररचना विभाग के कथित भ्रष्टाचार से लालचक्की के रहिवासी संकट में! गलत रोड अलाइनमेंट से सैकड़ों परिवारों पर बेघर होने का खतरा, विकास आराखड़े की अनदेखी के गंभीर आरोप

शौर्य टाईम्स : नीतू विश्वकर्मा

उल्हासनगर महानगरपालिका के नगररचना विभाग पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि विभाग के कुछ अधिकारियों ने कथित रूप से बिल्डरों, विकासकों और भूमाफियाओं के साथ मिलीभगत कर शहर विकास आराखड़ा (डीपी प्लान) के विपरीत सड़क का रेखांकन (अलाइनमेंट) किया, जिससे लालचक्की क्षेत्र के स्टेशन रोड – वीर सावरकर मार्ग पर वर्षों से रह रहे नागरिकों के आवास संकट में पड़ गए हैं।


स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शहर विकास योजना के अनुसार सड़क का मूल रेखांकन अलग था, लेकिन कुछ प्रभावशाली निर्माण परियोजनाओं को लाभ पहुंचाने के लिए उसे बदल दिया गया। इस कथित बदलाव का खामियाजा अब आम नागरिकों को भुगतना पड़ सकता है।

⚠️ विकासकों को बचाने के लिए बदला गया रेखांकन?

जानकारी के अनुसार, लालचक्की चौक से वीर सावरकर चौक तक जाने वाले मार्ग के दाहिने हिस्से में स्थित कुछ इमारतों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को प्रभावित होने से बचाने के लिए सड़क का रेखांकन बदला गया। आरोप है कि इस प्रक्रिया में शहर विकास आराखड़े की मूल योजना को दरकिनार किया गया।


स्थानीय सूत्रों के अनुसार, नियोजित आराखड़े के मुताबिक कई इमारतें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान आंशिक अथवा पूर्ण रूप से प्रभावित होने वाले थे, जिनमें कुछ प्रमुख इमारतों और व्यावसायिक परिसरों का भी समावेश बताया जा रहा है। लेकिन कथित रूप से कुछ निर्माण परियोजनाओं को बचाने के लिए सड़क को दूसरी दिशा में मोड़ने का प्रयास किया गया।

🔍 शासन की जांच में सामने आई अनियमितताएं

पिछले वर्ष इस मार्ग के निर्माण को लेकर शासन के पास शिकायत पहुंचने के बाद मामले की जांच के आदेश दिए गए थे। जांच के दौरान एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा किए गए सर्वेक्षण में कथित रूप से यह पाया गया कि वर्तमान में निर्मित सड़क का स्वरूप मूल विकास आराखड़े से मेल नहीं खाता और कई तकनीकी मानकों की अनदेखी की गई है।


रिपोर्ट में यह भी संकेत मिले हैं कि सड़क निर्माण और उसके रेखांकन में नियोजन नियमों का पालन नहीं किया गया, जिससे भविष्य में कानूनी और सामाजिक विवाद उत्पन्न हो सकते हैं।

🏠 रहिवासियों पर मंडरा रहा बेघर होने का खतरा

सबसे बड़ी चिंता उन परिवारों की है जो वर्षों से इस मार्ग के किनारे अपने घरों में रह रहे हैं। यदि भविष्य में शहर विकास आराखड़े के अनुसार सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया लागू की जाती है, तो अनेक घर, दुकानें और अन्य निर्माण प्रभावित हो सकते हैं।


स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि अधिकारियों और विकासकों की कथित गलतियों का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा। जिन्होंने अपनी जीवन भर की कमाई लगाकर घर खरीदे हैं, वे अचानक विस्थापन की स्थिति में आ सकते हैं।

📢 नागरिकों की मांग

रहिवासियों ने मांग की है कि:


✅ सड़क के मूल विकास आराखड़े को सार्वजनिक किया जाए।
✅ कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
✅ प्रभावित नागरिकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
✅ भविष्य में किसी भी सड़क चौड़ीकरण से पहले नागरिकों को विश्वास में लिया जाए।

🚨 जनजागरूकता एवं चेतावनी संदेश

शहर नियोजन में की गई छोटी सी अनियमितता भी भविष्य में हजारों लोगों के जीवन को प्रभावित कर सकती है। यदि लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही का नहीं बल्कि नागरिकों के आवासीय अधिकारों और शहर नियोजन की पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है।


अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और लालचक्की क्षेत्र के नागरिकों को न्याय एवं सुरक्षा कब तक मिल पाती है।

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