उल्हासनगर में ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत? 3.5 किमी डबल-डेकर फ्लाईओवर का DPR तैयार, ऊपर मेट्रो और नीचे दौड़ेंगे वाहन!


 

शौर्य टाईम्स : नीतू विश्वकर्मा 


कल्याण-अंबरनाथ हाईवे पर जाम से परेशान नागरिकों के लिए बड़ी खबर; शांति नगर से साईबाबा मंदिर तक प्रस्तावित परियोजना, लेकिन निर्माण के लिए मंजूरियों का इंतजार।


उल्हासनगर में लगातार बढ़ती यातायात जाम की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद जगी है। कल्याण-अंबरनाथ राज्य राजमार्ग पर शांति नगर के मुख्य प्रवेश द्वार से साईबाबा मंदिर तक लगभग 3.5 किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर का विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार कर लिया गया है। इस परियोजना में मेट्रो और सड़क यातायात के लिए डबल-डेकर परिवहन व्यवस्था विकसित करने की सिफारिश की गई है। हालांकि, परियोजना के निर्माण की अंतिम मंजूरियां अभी बाकी हैं।

क्या है डबल-डेकर फ्लाईओवर की योजना?


प्रस्तावित योजना के अनुसार, परिवहन व्यवस्था को तीन स्तरों पर विकसित करने का विचार है:

- सबसे ऊपर: प्रस्तावित मेट्रो लाइन 5A का कॉरिडोर।
- बीच में: वाहनों के आवागमन के लिए फ्लाईओवर।
- जमीन पर: मौजूदा सड़क, जिस पर सामान्य यातायात चलता है।

इस तरह सीमित शहरी जगह का बेहतर इस्तेमाल करते हुए सड़क और सार्वजनिक परिवहन की क्षमता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। यदि योजना को मंजूरी मिलती है और इसका निर्माण पूरा होता है, तो शांति नगर, साईबाबा मंदिर और हाईवे के अन्य व्यस्त हिस्सों में यातायात का दबाव कम होने की उम्मीद है।

DPR तैयार होने तक कैसे आगे बढ़ी परियोजना?


इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए उल्हासनगर के विधायक कुमार आयलानी ने 23 सितंबर को मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (MMRDA) से पत्राचार कर परियोजना पर कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद MMRDA ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के लिए Urban Mass Transit Company Ltd. (UMTC) को सलाहकार नियुक्त किया।

Free Press Journal की 19 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, MMRDA ने 15 अक्टूबर को पत्र के माध्यम से विधायक को DPR तैयार होने की जानकारी दी। अब परियोजना पर आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।

मेट्रो लाइन 5A से भी बढ़ेंगी कनेक्टिविटी की उम्मीदें


कल्याण और उल्हासनगर के बीच प्रस्तावित मेट्रो लाइन 5A क्षेत्रीय परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने की बड़ी योजना का हिस्सा है। Indian Express की मार्च 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, कल्याण–उल्हासनगर मेट्रो विस्तार लगभग 11.83 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित कॉरिडोर है, जिसकी अनुमानित लागत करीब ₹4,063 करोड़ बताई गई थी। इसमें सात स्टेशनों की योजना का उल्लेख किया गया था।

मेट्रो विस्तार और फ्लाईओवर की एकीकृत व्यवस्था से भविष्य में यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने तथा सड़क यातायात पर निर्भरता कम करने की संभावना है। हालांकि, मेट्रो परियोजना और फ्लाईओवर की वर्तमान मंजूरी एवं निर्माण स्थिति को अलग-अलग समझना जरूरी है।

नागरिकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना?


कल्याण-अंबरनाथ हाईवे उल्हासनगर के व्यावसायिक क्षेत्रों, बाजारों और घनी आबादी वाले इलाकों से होकर गुजरता है। यहां लगने वाला जाम रोजाना नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों, मरीजों, व्यापारियों और सार्वजनिक परिवहन से यात्रा करने वाले नागरिकों को प्रभावित करता है।

यदि परियोजना समय पर मंजूर होकर पूरी होती है, तो इससे संभावित रूप से:

- व्यस्त चौराहों पर यातायात का दबाव कम हो सकता है।
- यात्रा के समय और ईंधन की बर्बादी में कमी आ सकती है।
- मेट्रो और सड़क परिवहन के बीच बेहतर तालमेल बन सकता है।
- स्थानीय व्यापार और रोजाना आवागमन करने वाले नागरिकों को लाभ मिल सकता है।

सिर्फ DPR नहीं, अब मंजूरी और समयसीमा पर भी नजर जरूरी


DPR तैयार होना परियोजना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि निर्माण कार्य शुरू हो गया है या फ्लाईओवर की अंतिम मंजूरी मिल चुकी है। परियोजना की स्वीकृति, बजट, निर्माण की समयसीमा, यातायात प्रबंधन और कार्य के दौरान नागरिकों को होने वाली असुविधा जैसे सवालों पर आगे स्पष्ट जानकारी जरूरी होगी।

जनहित का सवाल: उल्हासनगर के नागरिक वर्षों से यातायात जाम की समस्या का सामना कर रहे हैं। ऐसे में प्रशासन और संबंधित प्राधिकरणों से अपेक्षा है कि वे परियोजना की मंजूरी, वित्तीय व्यवस्था और संभावित निर्माण समयसीमा को लेकर पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि नागरिकों को यह पता चल सके कि राहत की उम्मीद कब तक हकीकत में बदल सकती है।






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