शौर्य टाइम्स : नीतू विश्वकर्मा
बुद्ध भूमि फाउंडेशन ने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल को सौंपा पत्र; वैज्ञानिक जांच, प्रदूषण स्रोतों की मैपिंग और समयबद्ध नदी पुनर्जीवन कार्यक्रम की मांग
कल्याण/उल्हासनगर। उल्हासनगर शहर, वालधुनी और कल्याण परिसर से होकर बहने वाली वालधुनी नदी में बढ़ते रासायनिक, औद्योगिक एवं सीवेज प्रदूषण को लेकर बुद्ध भूमि फाउंडेशन ने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPCB) के क्षेत्रीय अधिकारी को पत्र सौंपकर तत्काल एवं प्रभावी कार्रवाई की मांग की है। पत्र दिनांक 8 अक्टूबर 2026 का है और इसमें नदी के प्रदूषणमुक्तीकरण तथा पुनर्जीवन के लिए विस्तृत उपाययोजना सुझाई गई है।
फाउंडेशन के अनुसार, वालधुनी नदी इस क्षेत्र की महत्वपूर्ण प्राकृतिक जलवाहिनी है, लेकिन लंबे समय से घरेलू सीवेज, औद्योगिक एवं रासायनिक अपशिष्ट तथा अनधिकृत व्यावसायिक/औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले प्रदूषित पानी के कारण नदी की जल गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। नदी में काला एवं दुर्गंधयुक्त पानी, रासायनिक प्रदूषण तथा बड़ी मात्रा में ठोस कचरा जमा होने से जलचर, जैवविविधता, नदी किनारे के पर्यावरण और नागरिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है।
प्रदूषण के स्रोतों की वैज्ञानिक जांच की मांग
फाउंडेशन ने नदी में मिलने वाले प्रत्येक नाले की GPS मैपिंग कर उसके स्रोत, प्रवाह, सीवेज की मात्रा और स्वरूप निर्धारित करने की मांग की है। साथ ही BOD, COD, TDS, pH, DO, Heavy Metals सहित आवश्यक रासायनिक घटकों की जांच कर Pollution Source Inventory तैयार करने का सुझाव दिया गया है।
इसके अलावा नदी के Upstream और Downstream क्षेत्रों से नियमित पानी के नमूने लेकर मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में परीक्षण कराने तथा जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग भी की गई है।
अनधिकृत उद्योगों पर कड़ी कार्रवाई की मांग
पत्र में Chemical Units, Washing Units, Dyeing/Processing Units समेत प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों की संयुक्त जांच की मांग की गई है। दोषी पाए जाने पर Closure Notice, Consent संबंधी कार्रवाई, Environmental Compensation और आवश्यक दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग रखी गई है।
सीवेज को नदी में जाने से रोकने की योजना
घरेलू एवं औद्योगिक सीवेज को नदी में जाने से रोकने के लिए आवश्यक स्थानों पर Interceptor Sewer, Diversion व्यवस्था, Pumping Station तथा STP स्थापित/दुरुस्त करने की मांग की गई है। औद्योगिक सीवेज के लिए आवश्यकता के अनुसार CETP/ETP व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।
STP और CETP की स्वतंत्र जांच
फाउंडेशन ने क्षेत्र में मौजूद STP/CETP की वास्तविक क्षमता, कार्यक्षमता, उपचार प्रक्रिया, Outlet Water Quality और Consent Conditions के पालन की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग की है। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित संस्था अथवा अधिकारी की जवाबदेही तय करने की बात कही गई है।
नदी में ऑनलाइन मॉनिटरिंग और Surprise Inspection की मांग
प्रमुख स्थानों पर Online Water Quality Monitoring System लगाने तथा pH, DO, Conductivity, TDS और Temperature जैसे मानकों की लगातार निगरानी करने का सुझाव दिया गया है। प्रमुख नालों पर आवश्यकता के अनुसार Flow Meter और CCTV लगाने तथा रात या छुट्टी के दिनों में प्रदूषण की संभावना को देखते हुए MPCB द्वारा Surprise Inspection और Night Inspection करने की मांग की गई है।
प्रदूषित गाद और कचरे के सुरक्षित निपटारे पर जोर
नदी में मौजूद Toxic/Contaminated Sludge की वैज्ञानिक जांच कर Heavy Metals अथवा अन्य खतरनाक तत्व पाए जाने पर Hazardous Waste नियमों के अनुसार सुरक्षित निपटारा करने की मांग की गई है। नदीपात्र एवं नदी किनारे जमा प्लास्टिक, औद्योगिक कचरा, रासायनिक कंटेनर और निर्माण मलबा तत्काल हटाने की भी मांग की गई है।
नदी किनारे हरित क्षेत्र विकसित करने का प्रस्ताव
वालधुनी नदी के दोनों किनारों पर स्थानीय प्रजातियों का वृक्षारोपण कर Riparian Buffer Zone विकसित करने तथा नदीकाठ, Flood Plain और जैवविविधतेचे संरक्षण के लिए आवश्यक उपाय लागू करने की मांग की गई है।
24 महीने में नदी पुनर्जीवन का लक्ष्य
पत्र में वालधुनी नदी के लिए समयबद्ध पुनर्जीवन कार्यक्रम लागू करने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके तहत—
- 30 दिनों में प्रदूषण स्रोतों का सर्वेक्षण एवं मैपिंग
- 3 महीनों में अनधिकृत प्रदूषण स्रोतों पर कार्रवाई
- 6 महीनों में नाले/सीवेज Interception और STP सुधार
- 12 महीनों में जल प्रदूषण में मापनीय कमी
- 24 महीनों में निर्धारित जल गुणवत्ता लक्ष्य हासिल करने के लिए नदी पुनर्जीवन की ठोस अमलदारी की मांग की गई है।
जिलास्तरीय विशेष निगरानी समिति की मांग
ठाणे जिलाधिकारी की अध्यक्षता में संबंधित विभागों को शामिल करते हुए विशेष निगरानी समिति गठित करने का प्रस्ताव भी दिया गया है। समिति द्वारा नियमित रूप से प्रदूषण स्रोतों, जल गुणवत्ता, STP/CETP की स्थिति, उद्योगों पर कार्रवाई और लंबित कार्यों की समीक्षा करने की मांग की गई है।
फाउंडेशन ने यह भी मांग की है कि MPCB के पास वालधुनी नदी के लिए पहले से उपलब्ध किसी भी कृति आराखड़े की अब तक हुई अमलदारी, लंबित कार्यों और संबंधित विभागों की जवाबदारी की स्वतंत्र समीक्षा कर उसे तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।
ATR सार्वजनिक करने की मांग
पत्र के अंत में शिकायत पर की गई कार्रवाई का Action Taken Report (ATR) लिखित रूप में उपलब्ध कराने की मांग की गई है। फाउंडेशन ने कहा है कि वालधुनी नदी क्षेत्र के पर्यावरण, जैवविविधता और नागरिकों के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक संपत्ति है, इसलिए इसके संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए संबंधित प्रशासन, स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं, प्रदूषण नियंत्रण तंत्र और औद्योगिक इकाइयों की सामूहिक जवाबदेही आवश्यक है।
शौर्य टाइम्स | पर्यावरण विशेष रिपोर्ट
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