
शौर्य टाईम्स : नीतू विश्वकर्मा
प्रदूषण और बिजली विभाग की कथित लापरवाही के खिलाफ सामाजिक संगठनों का जोरदार आंदोलन, प्रशासन बैकफुट पर
उल्हासनगर में अवैध रूप से संचालित जींस वॉश कारखानों के खिलाफ सामाजिक संगठनों द्वारा किए गए तीव्र आंदोलन के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। कल्याण स्थित महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (MSEDCL) कार्यालय परिसर में आयोजित धरना-प्रदर्शन के पश्चात बिजली विभाग ने अवैध कारखानों की बिजली आपूर्ति बंद करने का लिखित आश्वासन दिया है।
तीन वर्षों से लंबित कार्रवाई पर उठे सवाल
आंदोलनकारियों का आरोप है कि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPCB) द्वारा पिछले तीन वर्षों में कई बार निर्देश जारी किए जाने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने अवैध जींस वॉश कारखानों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई नहीं की। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, इन कारखानों से निकलने वाले रासायनिक अपशिष्टों के कारण वालधुनी नदी और उल्हास नदी का प्रदूषण स्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे पर्यावरण और जनस्वास्थ्य दोनों पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
संगठनों ने आरोप लगाया कि प्रदूषण नियंत्रण संबंधी आदेशों की अनदेखी कर बिजली आपूर्ति जारी रखने में संबंधित विभाग के कुछ अधिकारी और कर्मचारी भी जिम्मेदार हैं।
आंदोलन में कई सामाजिक संगठनों की भागीदारी
इस आंदोलन में छावा संगठन, प्रहार जनशक्ति संगठन, राष्ट्र कल्याण पार्टी, पर्यावरण मित्र संगठन सहित विभिन्न सामाजिक और पर्यावरणीय संगठनों के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें
✅ प्रदूषण फैलाने वाले अवैध जींस वॉश कारखानों की बिजली आपूर्ति तत्काल बंद की जाए।
✅ महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के आदेशों का सख्ती से पालन कराया जाए।
✅ बढ़ते बिजली बिलों एवं कथित रूप से अनिवार्य किए जा रहे स्मार्ट/अडानी मीटरों के मुद्दे पर नागरिकों को राहत दी जाए।
✅ आदेशों की अवहेलना करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई की जाए।
7 दिनों में कार्रवाई का आश्वासन
आंदोलन के बाद बिजली विभाग के मुख्य कार्यकारी अभियंता ने प्रतिनिधिमंडल से चर्चा की और अगले सात दिनों के भीतर अवैध जींस वॉश कारखानों की बिजली आपूर्ति काटने का लिखित आश्वासन दिया।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा कर्तव्य पालन में लापरवाही पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि प्रशासन अपने आश्वासन के अनुसार कार्रवाई करता है, तो इससे वालधुनी और उल्हास नदी में बढ़ते प्रदूषण पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी तथा पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
अब सभी की निगाहें अगले 7 दिनों पर टिकी हैं कि प्रशासन अपने वादे को कितना प्रभावी ढंग से अमल में लाता है।
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