उल्हासनगर में सवाल: कक्षा 1 से 6 तक की बच्चियों को ₹500 की सहायता योजना से वंचित क्यों रखा गया? कक्षा 1 से 12वीं तक सभी पात्र छात्राओं को समान लाभ देने की मांग!


शौर्य टाईम्स : नीतू विश्वकर्मा 


जब कक्षा 7वीं से 12वीं तक की छात्राओं को ₹500 प्रतिमाह मिल रहे हैं, तो कक्षा 1 से 6 तक की बच्चियों को इस योजना से वंचित क्यों रखा जाए? क्या उनकी शिक्षा और भविष्य का कोई महत्व नहीं?

उल्हासनगर में छात्राओं को ₹500 प्रतिमाह की आर्थिक सहायता देने की योजना को लेकर एक अहम सवाल उठ रहा है। कक्षा 7वीं से 12वीं तक की पात्र छात्राओं को योजना का लाभ दिया जा रहा है, लेकिन कक्षा 1 से 6 तक पढ़ने वाली बच्चियों को इससे बाहर क्यों रखा गया है? इस अंतर को लेकर योजना की पात्रता पर पुनर्विचार करने और प्राथमिक कक्षाओं की छात्राओं को भी शामिल करने की मांग की जा रही है।

आखिर कक्षा 1 से 6 तक की बच्चियों का क्या कसूर?

क्या वे बेटियां नहीं हैं? क्या उन्हें किताबों, कॉपियों, स्कूल यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक जरूरतों के लिए आर्थिक सहायता की आवश्यकता नहीं होती? जब योजना का उद्देश्य बेटियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करना है, तो सहायता की शुरुआत कक्षा 7वीं से ही क्यों?

सवाल शिवसेना नेतृत्व और उल्हासनगर महानगरपालिका प्रशासन से है: कक्षा 1 से 6 तक की छात्राओं को योजना से बाहर रखने का आधिकारिक कारण क्या है? क्या इन बच्चियों को भी समान आर्थिक सहायता देने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा?

प्रमुख मांग: कक्षा 1 से 12वीं तक सभी पात्र छात्राओं को मिले ₹500 प्रतिमाह

  • कक्षा 1 से 6 तक की छात्राओं को भी योजना में शामिल किया जाए।
  • कक्षा 1 से 12वीं तक सभी पात्र छात्राओं के लिए ₹500 प्रतिमाह सहायता का प्रस्ताव रखा जाए।
  • योजना की पात्रता और प्राथमिक कक्षाओं को बाहर रखने के कारण सार्वजनिक किए जाएं।
  • आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को शिक्षा के लिए समान अवसर उपलब्ध कराए जाएं।

बेटियों की शिक्षा में कक्षा के आधार पर अंतर क्यों?


उल्हासनगर के संबंधित जनप्रतिनिधियों और महानगरपालिका प्रशासन को इस सवाल पर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। योजना का विस्तार पात्रता नियमों, उपलब्ध बजट और प्रशासनिक समीक्षा के आधार पर किया जा सकता है।

हमारी मांग है—कक्षा 1 से 6 तक की बच्चियों को योजना से वंचित रखने के कारण स्पष्ट किए जाएं और कक्षा 1 से 12वीं तक सभी पात्र छात्राओं को ₹500 प्रतिमाह देने पर गंभीरता से विचार किया जाए।

बेटियां सभी की हैं, शिक्षा में समान अवसर सभी का अधिकार है!

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नोट: योजना की आधिकारिक पात्रता और कक्षा 1 से 6 तक की छात्राओं को बाहर रखने के कारण की पुष्टि महानगरपालिका के संबंधित दस्तावेजों से की जानी चाहिए।





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