शौर्य टाईम्स : नीतू विश्वकर्मा
मनोनीत नगरसेवक पद की दौड़ से बाहर होने की अटकलों के बीच कलानी परिवार से नाराजगी की खबरें, BJP में जाने की चर्चा तेज
उल्हासनगर की राजनीति में मनोनीत नगरसेवक पद को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इसी बीच हिंदी भाषी समाज की आवाज उठाने वाले और हिंदी भाषी फाउंडेशन के अध्यक्ष संतोष पांडे को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
सूत्रों के अनुसार, कलानी परिवार के साथ करीब 17 वर्षों से राजनीतिक रूप से जुड़े रहे संतोष पांडे को मनोनीत नगरसेवक पद की दौड़ में अपेक्षित महत्व नहीं मिलने से कथित तौर पर नाराजगी पैदा हुई है। हालांकि, इस संबंध में संतोष पांडे या कलानी परिवार की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
17 साल की निष्ठा, अब राजनीतिक भविष्य पर सवाल?
राजनीतिक हलकों में संतोष पांडे को कलानी गुट के निष्ठावान समर्थक के रूप में देखा जाता रहा है। सार्वजनिक रिपोर्टों में भी उनका नाम कलानी गुट से जुड़े प्रमुख लोगों में सामने आया है। वर्ष 2024 में ओमी कलानी की राजनीतिक गतिविधियों के लिए गठित कोर कमेटी में भी संतोष पांडे का नाम शामिल था।
वहीं, वर्ष 2025 के उल्हासनगर महानगरपालिका चुनाव के दौरान भी संतोष पांडे द्वारा अपक्ष के रूप में नामांकन दाखिल किए जाने की खबर सामने आई थी। इस घटनाक्रम ने उस समय भी राजनीतिक चर्चाओं को हवा दी थी।
वादों से लेकर पद तक—क्या बदले राजनीतिक समीकरण?
राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि संतोष पांडे को लंबे समय से महत्वपूर्ण राजनीतिक जिम्मेदारी और सम्मानजनक पद मिलने की उम्मीद थी। समर्थकों के बीच यह चर्चा भी है कि कलानी परिवार की ओर से उन्हें भविष्य में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने के आश्वासन दिए गए थे।
लेकिन अब मनोनीत नगरसेवक पद के संभावित समीकरणों में उनका नाम कमजोर पड़ने की चर्चा के बाद सवाल उठ रहा है कि—
- क्या 17 वर्षों की राजनीतिक निष्ठा का उचित सम्मान नहीं हुआ?
- क्या संतोष पांडे अब अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर नया फैसला लेने की तैयारी में हैं?
- क्या BJP का दामन थामेंगे संतोष पांडे? 🟠
- सबसे बड़ी चर्चा अब यह है कि यदि संतोष पांडे और कलानी परिवार के बीच राजनीतिक दूरी बढ़ती है, तो क्या वह भारतीय जनता पार्टी (BJP) का रुख कर सकते हैं?
फिलहाल यह केवल राजनीतिक अटकल और सूत्रों पर आधारित चर्चा है। संतोष पांडे के भाजपा में प्रवेश को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
हालांकि, उल्हासनगर की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए उनका अगला कदम निश्चित रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मनोनीत नगरसेवक पद ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी
उल्हासनगर महानगरपालिका में मनोनीत नगरसेवक पद को लेकर पहले से ही विभिन्न राजनीतिक गुटों में रस्साकशी चल रही है। स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में कलानी गुट, शिवसेना और भाजपा के बीच संभावित रणनीतियों पर लगातार चर्चा हो रही है।
ऐसे में अगर संतोष पांडे वास्तव में कलानी परिवार से दूरी बनाकर किसी दूसरे राजनीतिक दल का रुख करते हैं, तो इसका असर उत्तर भारतीय मतदाताओं और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
अब सबकी नजर संतोष पांडे के अगले राजनीतिक कदम पर टिकी है।
«अस्वीकरण: इस खबर में भाजपा में शामिल होने अथवा कलानी परिवार से संबंध समाप्त करने की बात को वर्तमान में सूत्रों/राजनीतिक चर्चाओं के आधार पर संभावित घटनाक्रम के रूप में प्रस्तुत किया गया है। संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया मिलने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।»





