महापौर के पहले जनता दरबार में भाजपा की गैरमौजूदगी पर सवाल, जनहित के मंच पर सियासत क्यों?




शौर्य टाईम्स : नीतू विश्वकर्मा 

शिवसेना के जनप्रतिनिधि नजर आए, भाजपा के नगरसेवक और उपमहापौर की अनुपस्थिति बनी चर्चा का विषय

उल्हासनगर महानगरपालिका की महापौर एडवोकेट अश्विनी कमलेश निकम के पहले “महापौर आपल्या भेटीला—जनता दरबार” का आयोजन सोमवार को गोल मैदान उल्सोलंअगर 1 के सोम्या मैरेज हॉल में किया गया। कार्यक्रम में नागरिकों ने अपनी समस्याएं सीधे महापौर के सामने रखीं, जिस पर संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

हालांकि, जनता दरबार में भाजपा के नगरसेवकों और नगरसेविकाओं की अनुपस्थिति अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। वहीं, शिवसेना से जुड़े जनप्रतिनिधि कार्यक्रम में नजर आए। उपमहापौर की गैरमौजूदगी पर भी सवाल उठ रहे हैं।

जनता पूछ रही है—आखिर क्यों?

क्या भाजपा के जनप्रतिनिधियों को कार्यक्रम की जानकारी या निमंत्रण नहीं मिला था?
यदि निमंत्रण मिला था, तो वे जनता के इस मंच से दूर क्यों रहे?
क्या राजनीतिक मतभेद अब जनहित के कार्यक्रमों तक पहुंच गए हैं?

महानगरपालिका का जनता दरबार किसी एक पार्टी का मंच नहीं, बल्कि नागरिकों की समस्याओं के समाधान का सार्वजनिक मंच है। ऐसे में राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सभी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी और आपसी समन्वय अपेक्षित है।

जनता का सीधा सवाल है—राजनीति अपनी जगह, लेकिन जनता की समस्याओं के मंच पर भाजपा और शिवसेना साथ क्यों नहीं?

अब देखना होगा कि भाजपा और उपमहापौर की गैरमौजूदगी पर क्या स्पष्टीकरण सामने आता है और क्या आगामी जनता दरबारों में सभी दलों के जनप्रतिनिधि एक साथ जनता की समस्याएं सुनते दिखाई देंगे।

नोट: महानगरपालिका की ओर से जारी प्रेसनोट में कार्यक्रम, महापौर के निर्देश और उपस्थित पदाधिकारियों की जानकारी दी गई है; भाजपा के नगरसेवकों की अनुपस्थिति का कारण उसमें स्पष्ट नहीं किया गया है। इसलिए इस गैरमौजूदगी का वास्तविक कारण संबंधित पक्ष के स्पष्टीकरण के बाद ही स्पष्ट होगा।

Post a Comment

Previous Post Next Post