31 घरों, मदरसे और मस्जिद को नोटिस का विरोध: उल्हासनगर मनपा के खिलाफ 21 अगस्त को जन आक्रोश महामोर्चा

 





शौर्य टाईम्स : नीतू विश्वकर्मा 

सुजात आंबेडकर की प्रमुख उपस्थिति में वंचित बहुजन आघाड़ी का आंदोलन; मनपा से कार्रवाई पर पुनर्विचार और प्रभावित परिवारों को न्याय की मांग।

उल्हासनगर महानगरपालिका द्वारा 31 घरों, एक मदरसे और मस्जिद को खाली करने संबंधी नोटिस जारी किए जाने के विरोध में वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA), उल्हासनगर के तत्वावधान में 21 अगस्त 2026 को जन आक्रोश महामोर्चा निकाला जाएगा। इस महामोर्चे में सुजात आंबेडकर की प्रमुख उपस्थिति रहेगी।

वंचित बहुजन आघाड़ी का आरोप है कि मनपा द्वारा की गई कार्रवाई से प्रभावित परिवारों और धार्मिक स्थल से जुड़े लोगों में भारी नाराजगी है। संगठन ने इस कार्रवाई को कथित भेदभावपूर्ण एवं अन्यायपूर्ण कार्रवाई बताते हुए प्रशासन से मामले की निष्पक्ष समीक्षा करने और प्रभावित लोगों की बात सुनने की मांग की है।

मनपा ने हाई कोर्ट में दाखिल की कैविएट

इसी मामले से संबंधित दस्तावेजों के अनुसार, उल्हासनगर महानगरपालिका और वार्ड समिति क्रमांक 2 के सहायक आयुक्त की ओर से मुंबई हाई कोर्ट में Caveat Application No. 3651 of 2026 दाखिल की गई है।

कैविएट में श्री मोहम्मद आज़म इदुल शेख, निवासी CTS No. 9321, महात्मा फुले नगर, उल्हासनगर-3, को कैविएट से संबंधित पक्ष के रूप में दर्शाया गया है। दस्तावेज में उल्लेख है कि संबंधित व्यक्ति 07 अगस्त 2026 को सहायक आयुक्त द्वारा जारी आदेश क्रमांक UMC/P.S/2/193/2026 को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर कर सकते हैं।

मनपा की ओर से दाखिल कैविएट का उद्देश्य यह है कि यदि संबंधित आदेश को चुनौती देते हुए कोई रिट याचिका या अंतरिम राहत की मांग अदालत के समक्ष की जाती है, तो मनपा को पूर्व सूचना दिए बिना कोई अंतरिम आदेश पारित न किया जाए और मनपा को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।

21 अगस्त को सड़क पर उतरेगा विरोध

वंचित बहुजन आघाड़ी द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, यह महामोर्चा 21 अगस्त 2026 को दोपहर 1:30 बजे डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर स्मारक, चोपड़ा कोर्ट, उल्हासनगर-3 से शुरू होगा और उल्हासनगर महानगरपालिका की ओर कूच करेगा।

VBA की ओर से सोनू पवार ने नागरिकों से इस आंदोलन में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है। संगठन का कहना है कि प्रभावित परिवारों, धार्मिक स्थलों और नागरिकों की समस्याओं को प्रशासन के सामने मजबूती से रखा जाएगा।

प्रशासन से पारदर्शी जांच और प्रभावितों की सुनवाई की मांग

इस पूरे मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि 31 घरों, मदरसे और मस्जिद को नोटिस जारी करने के पीछे मनपा की कार्रवाई का कानूनी एवं प्रशासनिक आधार क्या है और प्रभावित लोगों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिला है या नहीं।


जन आक्रोश महामोर्चे के जरिए आंदोलनकारी प्रशासन से नोटिस की निष्पक्ष समीक्षा, प्रभावित नागरिकों की सुनवाई, दस्तावेजों की पारदर्शी जांच और नियमानुसार उचित निर्णय की मांग रखेंगे।

शौर्य टाइम्स की अपील: संबंधित मनपा अधिकारी एवं प्रशासन इस मामले को संवेदनशीलता से लेते हुए सभी पक्षों की बात सुनें और तथ्यों एवं कानून के आधार पर उचित निर्णय सुनिश्चित करें, ताकि किसी भी प्रभावित परिवार के साथ अन्याय न हो और शहर में कानून के प्रति नागरिकों का विश्वास कायम रहे।




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